Essay on Inflation in Hindi: बढ़ती महंगाई पर निबंध

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Essay on Inflation in Hindi

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Essay on inflation in hindi ( मुद्रास्फीति पर निबंध) 150 Words  

वस्तुओं और सेवाओं के बढ़ने वाले मूल्य जिसके कारण मुद्रा की क्रय शक्ति कम होती है, मुद्रास्फीति (Inflation) कहलाता है। उदाहरण के लिए बाजार में एक किलो दाल की कीमत 180 रुपए है, लेकिन बाजार में मांग के अनुसार दाल पर्याप्त नहीं है, ऐसे में व्यापारी उस एक किलो दाल के दम बढ़ाकर 180 से 250 रुपए रख देंगे। जिसके कारण ग्राहक अब 180 रुपए किलो दाल 250 रुपए में खरीदने के लिए मजबूर हो जाएंगे। मुद्रास्फीति मुख्य रूप से दो कारणों से होती है, मांगजनित कारक और लागतजनित कारक।

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मांगजनित मुद्रास्फीति (Demand-Pull Inflation) में मांग बढ़ने से वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है। जबकि लागतजनित मुद्रास्फीति (Cost-Push Inflation) उत्पादन के कारकों जैसे की भूमि, पूंजी, श्रम, कच्चा माल आदि की लागत में वृद्धि होने के कारण होती है। भारत में मुद्रास्फीति की गणना (Inflation calculation) दो मूल्य सूचियां के आधार पर की जाती है, जिसमें थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index- WPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) शामिल है। दो से तीन प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर अर्थव्यवस्था के लिए ठीक होती है, लेकिन अत्यधिक मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित होती है। 

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Essay on Inflation a Critical Problem in Hindi 250 Words 

मांग और आपूर्ति में संतुलन होने के कारण वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमत बढ़ जाती है, जिसे मुद्रास्फीति कहा जाता है। मुख्य रूप से यह दो कारणों से होती हैं। एक है, मांगजनित मुद्रास्फीति और दूसरा लागतजनित मुद्रास्फीति। मांगजनित मुद्रास्फीति (Demand-Pull Inflation) में मांग के बढ़ने पढ़ने पर वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि होती है। जबकि लागतजनित मुद्रास्फीति (Cost-Push Inflation) में उत्पादन के कारकों जैसे की पूंजी, श्रम, भूमि कच्चा माल आदि की लागत में बढ़ोतरी होती है। भारत में मुद्रास्फीति को दो आधार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर मापा जाता है।

भारत में थोक मूल्य सूचकांक की गणना वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा की जाती है। भारत में वर्तमान मुद्रास्फीति दर 2023 (Inflation Rate in India 2023) मार्च 2023 तक 6.66% रही है। पिछले 61 सालों में भारत में उपभोक्ता कीमतों की मुद्रास्फीति दर -7.6% से 28.6% के बीच रही है। मुद्रास्फीति दर 2 से 3% तक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी होती है लेकिन इससे ज्यादा मुद्रास्फीति दर अर्थव्यवस्था के लिए बुरी साबित हो सकती है इसलिए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाना बहुत जरूरी है, मुद्रास्फीति पर निम्न तरीकों से नियंत्रण पाया जा सकता है।

  • पैसे की आपूर्ति सीमित होने पर मुद्रास्फीति में कमी आती है।
  • आयकर दरों में वृद्धि करने पर खरीददार की क्रय शक्ति कम होगी और मुद्रास्फीति किधर में भी कमी आएगी।
  • लंबी अवधि की योजनाओं में व्यावहारिक निवेश करके लोगों को भविष्य में मुद्रास्फीति की स्थितियों से निपटाने की मदद मिल सकेगी।
  • अपनी बचत को बढ़ाकर भी लोग बढ़ती हुई मुद्रास्फीति से मुकाबला कर सकते हैं।
Essay on Inflation in Hindi
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प्रस्तावना

समय के साथ अर्थव्यवस्था में विभिन्न माल और सेवाओं के मूल्य में होने वाली एक सामान्य वृद्धि को मुद्रास्फीति या महंगाई कहते हैं, या जब मांग और आपूर्ति में असंतुलन उत्पन्न होता है, तो वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि होती है, इसे ही मुद्रास्फीति कहा जाता है। मुद्रास्फीति के कारण मुद्रा की क्रय शक्ति कम हो जाती है, मुद्रास्फीति की अत्यधिक दर जनता और अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होती है। मुद्रास्फीति की विपरीत स्थिति में यानी समय के साथ माल और सेवाओं की कीमतों में गिरावट आने को अपस्फीति (Deflation) कहा जाता है। इन दोनों ही स्थिति में अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

मुद्रास्फीति के प्रकार

मुख्य रूप से मुद्रास्फीति के तीन प्रकार होते हैं। 

  • मांगप्रेरित मुद्रास्फीति: जब धन और ऋण की आपूर्ति में वृद्धि से अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता की अपेक्षा वस्तुओं एवं सेवाओं की समग्र मांग ज्यादा तेजी से बढ़ती है, तब मांग प्रेरित मुद्रास्फीति होती है।
  • लागत प्रेरित मुद्रास्फीति: जब धन और ऋण आपूर्ति में बढ़ोतरी को किसी अन्य परिसंपत्ति बाजार या वस्तु में प्रवाहित किया जाता है, तब लागत प्रेरित मुद्रास्फीति होती है। इसमें उत्पादन या सेवा की लागत बढ़ जाती है, इसके साथ ही उपभोक्ता कीमतों में भी बढ़ोतरी होती है।
  • अंतर्निहित मुद्रास्फीति: अंतर्निहित मुद्रास्फीति में  उत्पादन लागत जैसे की कच्चे माल और मजदूरी में वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब उत्पादन की वस्तुओं की मजदूरी के लिए श्रमिक अधिक लागत की मांग करते हैं।
मुद्रास्फीति के प्रभाव

मुद्रास्फीति के निम्न प्रभाव पड़ते हैं।

  • मुद्रास्फीति के कारण धन्य के मूल्य में गिरावट आती है क्योंकि जो चीज एक दिन पहले कम दाम की थी, वह मुद्रास्फीति के कारण अगले दिन महंगी हो जाती है।
  • जब उपभोक्ता सेवाओं के लिए अधिक राशि चुकाने पर राजी होते हैं, तो कंपनियां वस्तुओं की कीमतें बढ़ा देती हैं क्योंकि उन्हें पता होता है, कि ग्राहक वस्तु के लिए कोई भी राशि चुकाने को तैयार हो जाता है, इसी कारण समान और सेवाएं महंगे हो जाते हैं।
  • मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं के जीवन स्तर को प्रभावित करती है क्योंकि उपभोक्ता सुविधा के लिए वस्तु और सेवाओं पर अधिक खर्च करते हैं।
  • कच्चे माल का मूल्य बढ़ने पर विदेशी बाजार में उत्पादों की मांग कम हो जाती है और यह निर्यात राजस्व में गिरावट का कारण बनता है। 
मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के उपाय

निम्न उपायों को अपनाकर मुद्रास्फीति को नियंत्रित किया जा सकता है।

  • मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए वस्तु और सेवाओं पर मूल नियंत्रण के साथ वेतन नियंत्रण को लागू किया जा सकता है।
  • खुला बाजार परिचालन फेडरल रिजर्व धन आपूर्ति को बढ़ाता, घटाता और ब्याज दरों को समायोजित करता है।
  • मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए संकुचनकारी मौद्रिक नीति को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। इसमें ब्याज दरों को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था के भीतर धन की आपूर्ति को कम किया जाता है। 
  • छूट की दर के माध्यम से मुद्रास्फीति को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष

मुद्रास्फीति और उपस्थिति की अत्यधिक दरें दोनों ही अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित होती है, इसलिए इन दोनों का ही एक सीमित मात्रा में होना आवश्यक है। 2 से 3 प्रतिशत तक की मामले मुद्रास्फीति दर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक सिद्ध होती है। इसलिए सरकार को मुद्रास्फीति दर को नियंत्रित करने के लिए प्रभावशाली कदमों को उठाना चाहिए ताकि यह उपभोक्ताओं, उत्पादन और अर्थव्यवस्था को प्रभावित न करें। 

Mehangai Par Nibandh

हमारे सभी प्रिय विद्यार्थियों को इस “Essay on Inflation in Hindi जरूर मदद हुई होगी यदि आपको यह Mehangai Par Nibandh अच्छा लगा है तो कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको यह Essay on Inflation in Hindi कैसा लगा? हमें आपके कमेंट का इंतजार रहेगा और आपको अगला Essay या Speech कौन से टॉपिक पर चाहिए. इस बारे में भी आप कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं ताकि हम आपके अनुसार ही अगले टॉपिक पर आपके लिए निबंध ला सकें.

 

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